Thursday, December 31, 2020

Voices from Manzil’s Online Classes

An artwork by Khushi, 18, Reasoning Class

Due to the ongoing COVID pandemic, we shifted to online teaching since the month of April this year. These online classes have their own style and uniqueness and we thank all our Manzil teachers to make these classes fun, loving and interesting. Similarly, the contribution of all students is something worth sharing with you all.

Manzil’s Teachers with Prof. Anil Gupta

Prof. Anil Gupta Ji
Along with our regular teacher meetings and events, we at Manzil never miss out on Teachers Day. Under normal circumstances, we would have had a learningful session with many people. However this time, we were forced to conduct it online. To our surprise, tons of people showed up and it turned out to be a great success.

Impact of Togetherness: Manzil Teachers’ Meeting

Teachers and Mentors

Teachers are the pillars of Manzil. All of our 40 teachers adapted in the best possible ways during the pandemic to educate their students. Our Teachers' Meeting became one place to share such learnings and challenges, be together every month.  

15th अगस्त सेलिब्रेशन न्यू नॉर्मल के साथ


मंज़िल में सभी इवेंट जैसे लौहरी, न्यू ईयर पार्टी, “मंज़िल गॉट टैलेंट”, “मंज़िल उत्सव”, आदि सभी स्टूडेंट, वॉलिंटियर, टीचर्स एक साथ मिलकर बड़े हर्ष और उल्लास के साथ सेलिब्रेट करते हैं और साथ ही साथ इन सभी इन्वेंट्स को आयोजित करने में भी बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

चकमक मैगज़ीन: बच्चों का हुनर

चकमक एकलव्य संस्था द्वारा प्रकाशित बच्चों की एक मासिक हिन्दी पत्रिका है। एकलव्य एक ग़ैर-लाभकारी, ग़ैर-सरकारी संगठन है, जो मध्य प्रदेश में स्थित शिक्षा संसाधन केंद्रों के एक नेटवर्क के माध्यम से कार्य करता है।

एक अनूठा उत्सव ख़ुशियों के दान का


हमारा देश भारत, पूरे संसार में अपने रंग बिरंगे अनोखे त्योहारों और उत्सवों के लिए जाना जाता है। यहाँ साल भर कोई ना कोई उत्सव, देश के किसी ना किसी कोने में मनाया जाता रहता है, पर इन सबके बीच क्या आपने कभी किसी ऐसे उत्सव के बारे में सुना है जो किसी धर्म, प्रदेश, जाति या राष्ट्र से बढ़कर, पूरी मानवजाति द्वारा मनाया जाता हो? और जिसका किसी भी तरह के भेदभाव से उठकर, बस एक ही मकसद हो कि इस दुनिया को कैसे खुशहाल और बेहतर बनाया जाए।

Manzillions' expression for the year 2020 through poems

अनोखा साल 
साल तो कई आए और गए, पर ये साल कुछ अनोखा रहा,
कुछ समझ नहीं आ रहा था, कभी खुशी तो कभी ग़म के दरिया मे डुबोता रहा,
अचानक घर मे बंद होकर दम घुटने सा लगा,
बाहर की दुनिया से नाता जैसे टूटने सा लगा,